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ऐ पेंड़ तुझे क्या दर्द नही होता?

Posted On: 30 Apr, 2015 Others,कविता में

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ऐ पेंड़ तुझे क्या दर्द नही होता?
टूट कर गिरते है जो पत्ते तुझसे।
क्या इनका तुझे एह्सास नही होता।
क्या है कोई वजह या लग गई है तेरे दिल पर।
उनकी कोई छोटि सी बात।
आखिर क्या है मजबुरी, कौन सी है वो बात।
ना रख बोझ दिल पर, तु मुझे सब बता ।
ऐ पे‌ड़ तु खुद को ना इतना सता।
ना है कोइ वजह ना है कोइ बात ।
सुन रे ऐ पथिक तु मेरे मन कि बात ।
ये गिरे है जो पत्ते तेरे आस-पास ।
इनका मुझसे तो था, बस आज ही तक का साथ।
सुन रे ऐ पथिक गौर से तु ये बात ।
ये जो होता है दुनिया मे तेरे-मेरे साथ ।
ये सब करने मे है, बस काल चक्र का ही हाथ ।
रख ले मन मे तु अपने, मेरी छोटि सी बात ।
कर कर्तव्य अपना, ना कर कोई संताप ।
अपने इष्ट पर रख, तु पूरा विश्वास ।

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
April 30, 2015

पेड़ को भी दर्द होता है जब उसको बोनसाई बना कर ड्राइंग रूम मैं छोटे से गमले मैं सजा देते हैं बहुत अच्छी कविता कर कर्तव्य अपना, ना कर कोई संताप । अपने इष्ट पर रख, तु पूरा विश्वास । सार पूर्ण पंक्तियाँ डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
May 1, 2015

श्री रवि जी बहुत दर्द होता है जब बोनसाई बना कर गमले में रख कर ड्राइंग रूम में सजा दिया जाता है मेरे जोड़ काट दिए जाते हैं उसे कला का नाम दिया जाता है पेड़ के दर्द को जाना ईश्बर आपको चिरायु रखे  डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
May 1, 2015

प्रिय रवि जब मुझे बोनसाई बना कर गमले में किसी ड्राइंग रूम में सजा देते हैं बहुत दुःख होता है डॉ शोभा

ravichandra के द्वारा
May 2, 2015

मै अपने सभी दोस्तो से यह कहुंगा कि वे पौधो को उंके प्रक्रितिक जगह पे रहने दे और मै खुद पेंड़ो को बगीचे मे लगाता हु तकि उंको प्रक्र्ति का साथमिलसके… आशा कर्ताहुआप भी ऐसा करेंगी..

ravichandra के द्वारा
May 2, 2015

हॉ दर्द तो पेंड़ो को भी होता है पर वे अपना दर्द भुला कर समय के साथ आगे बढ्ते है हम मनुष्यो कि तरह किसी बात का रोना नही रोते.. मै इस कविता के मध्यम से यहि कहना चहता हु कि हम सब को भी समय के साथ चलाना और बद्लना चहिये..

ravichandra के द्वारा
May 2, 2015

जिस प्रकार हम एक दिन किसि कमरे मे नही गुजर सक्ते उसि प्रकार पेड भी ड्राईग रूम मे नही रह सकते उन्हे भी खुलि हवा मे सान्स लेने देने चहिये…

ganga singh rawar के द्वारा
May 3, 2015

अति उत्तम ऐसे ही लिखते रहे बधाई.

ravichandra के द्वारा
May 3, 2015

धन्यवाद!!गंगा जी .. मेरी कोशिश यहि रहेगी कि मै और अच्छा लिखु.


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