मेरी बात

दिल से दुनियॉ तक.......

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ravichandra


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मजहब नही है फूलो का

Posted On: 4 Aug, 2015  
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आतंकवाद पर राजनीति

Posted On: 2 Aug, 2015  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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गवांर कौन

Posted On: 12 Jul, 2015  
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वक़्त के साथ बदल्ता है इंसान

Posted On: 10 Jul, 2015  
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टुट्ता नन्हा तारा

Posted On: 9 Jul, 2015  
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सिक्के की व्यथा

Posted On: 3 May, 2015  
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Others social issues में

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ऐ पेंड़ तुझे क्या दर्द नही होता?

Posted On: 30 Apr, 2015  
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मेरी मर्जी

Posted On: 5 Apr, 2015  
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रिश्ते खोता इंसान है

Posted On: 17 Feb, 2015  
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AYE PHOOL MERE CHAMAN KE…………..

Posted On: 19 Mar, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रिय रविचंद्र जी, सरकार पूरी तरह से दोषी है. शांतिपूर्ण आंदोलन को भाव नहीं दिया जाता है. जब आंदोलन उग्र होता है तब नींद खुलती है. दोनों पक्ष के नेता अपनी अपनी अपनी रोटी सेंकते हैं यह मैं आज से नहीं देख रहा हूँ. पहले भाजपा करती थी आज दूसरे विपक्षी दल कर रहे हैं. जंतर मटर पर शांतिपूर्ण आंदोलन करनेवाले को नाटक कमपनी का कलाकार बताया गया. उनसे कोई भी दल का सम्मानित नेता मिलने तक नहीं गया. हम अच्छी तरह जानते हैं की सरकारी संपत्ति का नुकसान मतलब देश का नुकसान जिसकी भरपाई आम जनता ही करती है. कोई भी आम आदमी लूट पात या दंगा फसाद नहीं करता. इसके पीछे किसी न किसी बड़ी हाश्ती का हाथ होता है. बाकी आपको भी सब समझ में आने लगेगा.

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